सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग

एक बार दो लड़के थे । जिनकी उम्र 10 व 12 वर्ष थी । दोनों बहुत पक्के दोस्त थे । उनकी दोस्ती इतनी पक्की थी, कि वह हर काम साथ करते , जहां भी जाते साथ जाते , खाते , पीते , खेलते सब साथ करते ।

दो दोस्त

दोनों दोस्त दूर निकल गए

एक दिन दोनों दोस्त बोल से खेल रहे थे । खेलते खेलते वह गांव से बहुत दूर निकल गए । वे दोनों दोस्त एक सुनसान सी जगह पर पहुंचे जहां दूर-दूर तक कोई नहीं था । वहां खेत में खेलने लगे । खेलते खेलते उनकी बॉल एक सूखे कुएं में गिर गई । बड़ा वाला लड़का बोला कि चिंता मत करो मैं इसे निकाल दूंगा और जोश जोश में वह लड़का कुएं में गिर गया ।

अब छोटा लड़का , जिसकी उम्र 10 वर्ष थी , घबरा गया उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करें । अब बड़ा लड़का कुएं से बचाओ बचाओ चिल्लाने लगा और छोटा लड़का बाहर से बचाओ बचाओ चिल्ला रहा था । पर वहां दूर-दूर तक कोई नहीं था कोई हो तो सुने ।

छोटे को समझ ही नहीं आ रहा था कि करे तो क्या करें । तभी उसे अचानक झाड़ियों में एक रस्सी और एक बाल्टी दिखाई दी । वह भाग कर उन्हें ले आया और रस्सी बाल्टी से बांध कर कुएं में डाल दी । अब अपने दोस्त से बोला कि इसमें खड़े होकर आ जाओ । मैं तुम्हें खींच लूंगा बड़ा लड़का बोला कि पागल हो गए हो तुम मुझे कैसे खींच पाओगे मैं तुमसे बड़ा हूं और तुम छोटे तुमसे नहीं होगा ।

परन्तु छोटे लड़के ने विश्वास दिलाया कि मैं खींच लूंगा तुम आओ तो सही और बड़ा लड़का रस्सी पकड़ कर खड़ा हो गया । छोटे के हाथ बुरी तरह से दर्द कर रहे थे , घायल भी हो रहे थे उसका गला सूख रहा था पर उसने हिम्मत दिखाई और उसे कुएं से बाहर निकाल दिया ।

अब दोनों दोस्त वापस अपने गांव आए तो देखा पंचायत लगी हुई थी और दोनों बच्चों के मां-बाप रोए जा रहे थे । वे घबराए हुए थे कि बच्चे कहां चले गए तभी उनकी नजर बच्चों पर पड़ी उन्हें देखकर मां-बाप के मन को तसल्ली हुई ।

बच्चों के मां-बाप ने पूछा कि कहां गए थे । दोनों दोस्त घबराए हुए थे , समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या बताएं सच बोलेंगे तो डांट पड़ेगी और झूठ बोले तो क्या बोले । पर छोटे लड़के ने हिम्मत करके सच बता दिया जैसे ही उसने सच बोला , सब उसके ऊपर हंसने लगे मजाक उड़ाने लगे कि झूठ बोल रहा है । भला बड़े को तू कैसे खींच सकता है ।

तभी वहां एक बुजुर्ग सरपंच बैठे थे । उन्होंने सबको चुप कराया और बोले कि यह सच कह रहा है इसने ऐसा किया होगा क्योंकि ये जहां पर थे , इनकी मदद करने के लिए कोई नहीं था इसके पास कोई और विकल्प नहीं था । यह जानता था कि अगर इसने इसे नहीं बचाया तो यह मर जाएगा ।

इसे ही उसे बाहर निकालना पड़ेगा । और दूसरी बात कि इसके पास कोई ऐसा नहीं था जिससे यह कह सके कि तुम से नहीं होगा । इसके मन में आत्म विश्वास भरपूर था । जिसने इसे शक्ति दी ।

क्या कहेंगे लोग

इसी तरह अगर हम ठान लें कि हम किसी भी बड़े से बड़े काम को कर सकते हैं और दूसरे लोगों की सुनना बंद कर दें , और यह सोचना बंद कर दें कि क्या कहेंगे तो यकीनन हम सफल होंगे ।

इस छोटे से जीवन का आधा समय तो हम दूसरों की सुनने में ही निकाल देते हैं हम जब भी अपना कोई लक्ष्य निर्धारित करते हैं तो सोच सबसे पहले जो हमारे दिमाग में आती है वह यह कि लोग क्या कहेंगे । इन सब बातों को सोच कर कई बार हम अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं और दूसरी तरफ जब हम अपना कोई बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं तो बहुत सारे लोग यही कहते हैं कि तुम से नहीं होगा । और हम डेमोलाइज हो जाते हैं हमारा उत्साह धराशाई हो जाता है और हम अपना मन बदल लेते हैं ।

इसलिए सदा अपने मन की सुनिए जो आप करना चाहते हैं उसे सच्चा विश्वास और लगन के साथ करिए आप यकीनन सफल होंगे ।

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