नेकी का फल – Best Motivational Story for Kids

अगर आप बच्चों के लिए प्रेरणादायक कहानियाँ (motivational story for kids) खोज रहे हैं जो उनके भीतर दया, मदद, परिश्रम और चरित्र निर्माण जैसी अच्छी आदतें विकसित कर सके तो “नेकी का फल” एक बेहतरीन कहानी है।

यह कहानी (motivational story for kids) छोटे बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी महत्वपूर्ण सीख देती है। यह सिखाती है कि
नेकी कभी व्यर्थ नहीं जाती और भलाई का फल हमेशा मीठा होता है।

नेकी का फल Motivational Story for Kids

पहाड़ीपुर जंगल में एक छोटा-सा गाँव था, जहाँ सभी जानवर आपस में मिल-जुलकर रहते थे। इस गाँव में एक मेहनती कछुआ रहता था, जिसका नाम था धीमा। धीमा धीरे-धीरे चलता था, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। वह हमेशा दूसरों की मदद करता, चाहे कितनी भी मेहनत क्यों न करनी पड़े।
जंगल के जानवर उसकी नेकी की तारीफ करते, लेकिन चालाक फॉक्स मिला जिसका नाम था फुर्तीला, जो हमेशा अपनी चालाकी पर इतराता था, धीमा का मजाक उड़ाता और कहता,

“धीमा, तुम्हारी नेकी से क्या फायदा? दुनिया चालाकी से चलती है, मेहनत से नहीं!”

एक बार जंगल में भयंकर सूखा पड़ गया। तालाब का पानी सूखने लगा, और जंगल के जानवरों को पीने का पानी मिलना मुश्किल हो गया। जंगल के बड़े जानवर—रुद्र शेर, भोलू भालू, और शीना शेरनी—सबने मिलकर फैसला किया कि वे नदी के ऊपरी हिस्से से पानी लाएँगे।

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लेकिन नदी का रास्ता लंबा और खतरनाक था, और पानी लाने के लिए भारी मटके ढोने पड़ते थे।
फुर्तीला फॉक्स ने हँसकर कहा, “मैं तो इतनी मेहनत नहीं करूँगा। कोई आसान रास्ता ढूँढो!” और वह वहाँ से चला गया।

धीमा कछुए ने सुना तो उसने बुद्धू बगुले से कहा, “बुद्धू दादा, मैं पानी लाने में मदद करूँगा। भले ही मैं धीमा हूँ, लेकिन मैं कोशिश करूँगा।” बुद्धू बगुले ने मुस्कुराते हुए कहा, “धीमा, तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है। जाओ, अपनी नेकी से सबका दिल जीत लो ।”

धीमा ने एक छोटा मटका अपनी पीठ पर लादा और धीरे-धीरे नदी की ओर चल पड़ा। रास्ते में काँटेदार झाड़ियाँ थीं, पत्थर बिखरे थे, और सूरज की गर्मी तप रही थी। धीमा रुक-रुककर चलता रहा , लेकिन उसने हार नहीं मानी।
रास्ते में उसे फुर्तीला फॉक्स मिला, जो एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। फुर्तीला ने हँसते हुए कहा, “अरे धीमा, तुम इस मटके को लेकर नदी तक पहुँचोगे? यह काम तुम्हारे बस का नहीं!” धीमा ने शांत स्वर में जवाब दिया, “फुर्तीला, कोशिश करने में क्या हर्ज है?

अगर मैं एक बूँद भी पानी ला सका, तो किसी की प्यास बुझ जाएगी।”

फुर्तीला ने मुँह बनाया और सो गया। कई घंटों की मेहनत के बाद धीमा नदी तक पहुँचा। उसने मटके में पानी भरा और धीरे-धीरे वापस लौटने लगा।
रास्ते में उसने देखा कि एक छोटा खरगोश, चिंटू, प्यास से बेहाल होकर जमीन पर लेटा है। धीमा ने तुरंत अपने मटके से पानी निकाला और चिंटू को पिलाया। चिंटू की जान में जान आई, और उसने धीमा का शुक्रिया अदा किया। धीमा ने मुस्कुराकर कहा,

“नेकी का फल तुरंत मिलता है, चिंटू। तुम ठीक हो, यही मेरी खुशी है।”


जब धीमा गाँव पहुँचा, तो उसके मटके में थोड़ा-सा ही पानी बचा था, रस्ते में उसे जो भी प्यासा मिला उसे धीमा पानी पिलाता गया लेकिन उसकी नेकी की कहानी जंगल में फैल चुकी थी। चिंटू ने सबको बताया कि धीमा ने उसकी जान बचाई। जंगल के सारे जानवर तालाब के पास इकट्ठा हुए और धीमा की तारीफ करने लगे। रुद्र शेर ने कहा, “धीमा, तुमने दिखा दिया कि नेकी की ताकत सबसे बड़ी होती है।”

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भोलू भालू और शीना शेरनी ने मिलकर धीमा से प्रेरित होकर और मटके लाने का फैसला किया। फुर्तीला फॉक्स, जो अब तक सो रहा था, जब गाँव लौटा तो सबको धीमा की तारीफ करते देखा। वह शर्मिंदगी से सिर झुकाकर धीमा के पास गया और बोला, “धीमा, मैंने तुम्हारा मजाक उड़ाया, लेकिन तुमने साबित कर दिया कि नेकी का फल हमेशा मीठा होता है। मुझे माफ कर दो।”

धीमा ने हँसकर कहा, “फुर्तीला, कोई बात नहीं। चलो, अब तुम भी मेरे साथ पानी लाने में मदद करो!” उस दिन से जंगल के जानवरों ने मिलकर तालाब को फिर से भर दिया। धीमा को “नेकी का सितारा” कहा जाने लगा और उसकी कहानी जंगल में हर बच्चे को सुनाई जाने लगी।

motivational story for kids से नैतिक शिक्षा:

नेकी का फल हमेशा मीठा होता है। दूसरों की मदद करने से न केवल दूसरों का भला होता है, बल्कि हमारा सम्मान और खुशी भी बढ़ती है।
यह motivational story for kids सिखाती है कि भलाई का प्रभाव गहरा होता है, संकट में मदद करना सबसे बड़ा धर्म है और चरित्र, चालाकी से बड़ा होता है।

इस कहानी को बच्चों को क्यों सुनाएँ? (Why This is a Motivational Story for Kids)

1 . यह बच्चों के दिल में दया और मदद की भावना जगाती है।

2 . उन्हें सिखाती है कि निःस्वार्थ भलाई हमेशा लौटकर आती है।

3 . इससे चारित्रिक विकास और सकारात्मक सोच बनती है।

4 . बच्चों के लिए यह कहानी एक शानदार motivational story for kids है।

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FAQ

‘नेकी का फल’ कहानी क्या सिखाती है?

यह कहानी सिखाती है कि अच्छे कर्मों का फल हमेशा अच्छा ही मिलता है, चाहे देर से ही क्यों न मिले। नेक काम कभी व्यर्थ नहीं जाते।

‘नेकी का फल’ कहानी बच्चों को क्यों सुनानी चाहिए?

क्योंकि यह बच्चों में दयालुता, मदद करने की भावना, और ईमानदारी जैसे गुण विकसित करती है। इससे उन्हें समझ आता है कि हर अच्छे काम का प्रतिफल सकारात्मक होता है।

‘नेकी का फल’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

“नेकी कभी बेकार नहीं जाती। जो जैसा बोता है, वैसा ही फल पाता है।”

क्या ‘नेकी का फल’ एक वास्तविक घटना पर आधारित है?

यह एक नीतिकथा (Moral Story) है, जो जीवन-शिक्षा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसलिए इसका मकसद मनोरंजन के साथ-साथ सीख देना है।

‘नेकी का फल’ कहानी किस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त है?

यह कहानी 4 साल से लेकर 14 साल तक के बच्चों के लिए बिल्कुल सही है। सरल भाषा में समझाने पर छोटे बच्चे भी इसे आसानी से समझ सकते हैं।

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